विधानसभा का विशेष सत्र ही पंचायती राज एक्ट में संशोधन का एकमात्र रास्ता, 2021 में आया था विधेयक
पंचायतीराज विभाग की हीलाहवाली से सांविधानिक संकट पैदा हुआ है। प्रशासकों की पुनर्नियुक्ति के लिए परीक्षण के बाद अध्यादेश को अनुमोदन के लिए राजभवन भेजा जाना चाहिए था, लेकिन समय रहते इस दिशा में कुछ न कर अंतिम समय में आनन-फानन अध्यादेश राजभवन भेजा गया।
प्रदेश की त्रिस्तरीय पंचायतों में प्रशासकों की पुनर्नियुक्ति संबंधी अध्यादेश को राजभवन से बिना मंजूरी लौटा दिए जाने के बाद अब विधान सभा का विशेष सत्र ही पंचायती राज एक्ट में संशोधन का एकमात्र विकल्प है। जानकारों का कहना है कि पंचायतीराज विभाग की हीलाहवाली के कारण राज्य में इस तरह के सांविधानिक संकट की स्थित बनी है।
पंचायतों में प्रशासकों की पुनर्नियुक्ति संबंधी अध्यादेश को मंजूरी न मिलने से पंचायतों में सामान्य काम-काज भी ठप है। जानकार बताते हैं कि त्रिस्तरीय पंचायतों की स्थिति बिना चालक के वाहन की बन गई है। पंचायतों में जब चुनाव नहीं कराने थे, तो प्रशासकों की पुनर्नियुक्ति के लिए परीक्षण के बाद अध्यादेश को अनुमोदन के लिए राजभवन भेजा जाना चाहिए था, लेकिन समय रहते इस दिशा में कुछ न कर अंतिम समय में आनन-फानन अध्यादेश राजभवन भेजा गया। अब सरकार विधान सभा का विशेष सत्र बुलाकर पंचायती राज एक्ट में संशोधन कर सकती है या फिर चार जून को कैबिनेट बैठक में जिलाधिकारियों को पंचायतों के लिए अधिकृत करने का प्रस्ताव लाया जा सकता है।
अभी है यह व्यवस्था
प्रदेश की पंचायतों में अभी मात्र छह महीने के लिए प्रशासक नियुक्त करने की व्यवस्था है। जिनकी पुनर्नियुक्ति की एक्ट में अभी कोई व्यवस्था नहीं है।
विधानसभा में 2021 में आया था विधेयक
पंचायती राज एक्ट में संशोधन का विधेयक 2021 में विधानसभा में लाया गया था मगर इसे मंजूरी नहीं मिली थी। अगर मंजूरी मिल जाती तो अति अपरिहार्य परिस्थितियों में दोबारा छह माह से अनाधिक अवधि के लिए पंचायतों में प्रशासकों का कार्यकाल बढ़ाया जा सकता था।
पंचायती राज विभाग ने इसके लिए पहले से कोई होमवर्क नहीं किया, यदि ऐसा किया गया होता तो पंचायतों में सांविधानिक संकट की स्थिति न बनती। – जगत मार्तोलिया, संयोजक पंचायत संगठन

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