हल्द्वानी। रामलीला मैदान में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा के बाद सामने आए कथित शुद्धिकरण प्रकरण को लेकर उत्तराखंड की सियासत गरमा गई है। कांग्रेस के आरोपों पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तीखा पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष के पास ऐसा कोई तथ्य या प्रमाण नहीं है, जिससे यह साबित हो कि किसी व्यक्ति का अपमान करने के उद्देश्य से शुद्धिकरण यज्ञ कराया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी व्यक्ति का अपमान करना भारतीय जनता पार्टी की नीति नहीं है। उन्होंने विपक्ष पर संवेदनशील मुद्दे को राजनीतिक रंग देकर समाज में भ्रम और विभाजन पैदा करने का आरोप लगाया। सीएम धामी ने कहा कि मामले में यदि किसी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी।
खरगे की जनसभा के बाद शुरू हुआ विवाद
दरअसल, हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा के बाद कथित तौर पर मंच के शुद्धिकरण का मामला सामने आया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि जनसभा के बाद मंच का शुद्धिकरण कर दलित समाज और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का अपमान किया गया।
कांग्रेस ने इस घटना को सामाजिक न्याय और दलित सम्मान से जोड़ते हुए मामले में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। पार्टी नेताओं का कहना है कि सार्वजनिक मंच का इस तरह शुद्धिकरण किया जाना सामाजिक भेदभाव की मानसिकता को दर्शाता है।
पुलिस ने दर्ज की प्राथमिकी
विवाद बढ़ने के बाद हल्द्वानी पुलिस ने तहरीर के आधार पर अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस ने संबंधित धाराओं के साथ बीएनएस (BNS) और एससी/एसटी एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस की विशेष टीम पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। वायरल वीडियो फुटेज और उपलब्ध अन्य साक्ष्यों को भी जांच के दायरे में लिया गया है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित शुद्धिकरण की घटना वास्तव में किन परिस्थितियों में हुई और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।
बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों को बताया राजनीतिक मुद्दा
वहीं, भारतीय जनता पार्टी की ओर से कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश बताया जा रहा है। बीजेपी का कहना है कि मामले को लेकर बिना पर्याप्त तथ्यों के आरोप लगाए जा रहे हैं और इसे सामाजिक विवाद का रूप देने का प्रयास किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री धामी के बयान के बाद इस मुद्दे पर सियासी बहस और तेज हो गई है। कांग्रेस जहां इसे दलित सम्मान और सामाजिक न्याय का मुद्दा बता रही है, वहीं बीजेपी तथ्यों और जांच के सामने आने का इंतजार करने की बात कह रही है।
अब पुलिस जांच और सामने आने वाले साक्ष्यों पर सभी की नजर है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि रामलीला मैदान में कथित शुद्धिकरण की घटना किन परिस्थितियों में हुई और इसके पीछे वास्तविक तथ्य क्या हैं।

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