देहरादून । उच्च शिक्षा संस्थानों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के व्यक्तिगत डाटा की सुरक्षा अब विश्वविद्यालयों की सीधी जिम्मेदारी होगी। यदि किसी विश्वविद्यालय से छात्रों का डिजिटल डाटा लीक होता है तो संबंधित विश्वविद्यालय को इसके लिए जवाबदेह माना जाएगा।
राज्य सरकार ने सभी राजकीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को केंद्र सरकार के डिजिटल पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) एक्ट का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
उच्च शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि विश्वविद्यालयों को छात्रों के व्यक्तिगत डाटा की गोपनीयता बनाए रखने के साथ अपने वेब पोर्टल, आनलाइन सेवाओं और डिजिटल रिकार्ड को साइबर हमलों से सुरक्षित रखने के लिए प्रभावी सुरक्षा उपाय लागू करने होंगे। बढ़ते साइबर खतरों को देखते हुए डिजिटल डाटा की सुरक्षा बड़ी चुनौती बन चुकी है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
डिजिटल सुरक्षा होगी प्राथमिकता
विश्वविद्यालयों को अपने वेब एप्लिकेशन, सर्वर और डिजिटल डाटाबेस को साइबर हमलों से सुरक्षित रखने के लिए मजबूत साइबर सुरक्षा व्यवस्था विकसित करनी होगी। डाटा लीक और आनलाइन धोखाधड़ी की घटनाओं की रोकथाम के लिए नियमित सुरक्षा आडिट और आवश्यक तकनीकी उपाय अपनाने पर भी जोर दिया गया है।
दो लाख से अधिक छात्रों का डाटा रहेगा सुरक्षित
प्रदेश के 11 राज्य विश्वविद्यालयों और एक केंद्रीय विश्वविद्यालय में दो लाख से अधिक छात्र अध्ययनरत हैं। इन सभी छात्रों के व्यक्तिगत डाटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए डीपीडीपी एक्ट के प्रविधानों का पालन अनिवार्य किया गया है, ताकि साइबर फ्राड और डाटा के दुरुपयोग की आशंका को न्यूनतम किया जा सके।

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