दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता के लिए प्रभावी कदम उठाएं: मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन

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एमएसपी पर दलहन खरीद के लिए केंद्र को प्रस्ताव भेजने के निर्देश, उत्पादकता 12 कुंतल प्रति हेक्टेयर तक बढ़ाने पर जोर

देहरादून। उत्तराखंड में दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने और प्रदेश को दलहन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार ने प्रयास तेज कर दिए हैं। शुक्रवार को सचिवालय सभागार में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में भारत सरकार की दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता से संबंधित परियोजना की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में दलहन उत्पादन बढ़ाने, उत्पादकता एवं गुणवत्ता में सुधार करने तथा किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के संबंध में विस्तृत चर्चा की गई।

एमएसपी पर दलहन खरीद का प्रस्ताव केंद्र को भेजने के निर्देश

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में उत्पादित दलहन की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद के लिए प्रस्ताव तैयार कर भारत सरकार को भेजा जाए। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के साथ-साथ सुनिश्चित बाजार उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए।

उन्होंने निर्देश दिए कि दलहन की खरीद नैफेड (NAFED) एवं एनसीडीसी (NCDC) के माध्यम से किए जाने के संबंध में आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर केंद्र सरकार से अनुमोदन प्राप्त किया जाए।

किसान उत्पादक संगठनों को मिलेगा बढ़ावा

मुख्य सचिव ने किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष सेल गठित करने तथा इस संबंध में प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि संगठित किसान समूहों के माध्यम से दलहन के उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा दिया जा सकता है।

उन्होंने दलहन की उत्पादकता एवं गुणवत्ता में सुधार करते हुए इसे 12 कुंतल प्रति हेक्टेयर तक पहुंचाने के लिए प्रभावी प्रयास करने को कहा। इसके लिए उन्नत बीज, आधुनिक कृषि तकनीकों, फसल प्रदर्शन कार्यक्रमों और किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए।

दलहन उत्पादन बढ़ने से पोषण स्तर में होगा सुधार

मुख्य सचिव ने कहा कि दलहन के उत्पादन एवं गुणवत्ता में वृद्धि से प्रदेश में प्रोटीन की उपलब्धता बढ़ेगी। इससे लोगों के स्वास्थ्य में सुधार के साथ-साथ स्वस्थ एवं सक्षम मानव संसाधन के निर्माण में भी मदद मिलेगी।

उन्होंने अधिकारियों को केंद्र सरकार की इस महत्वपूर्ण परियोजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।

2025-26 से 2030-31 तक संचालित होगी परियोजना

बैठक में कृषि एवं संबंधित विभागों के अधिकारियों ने जानकारी दी कि भारत सरकार की दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता से संबंधित यह परियोजना वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक संचालित की जाएगी। परियोजना के तहत प्रदेश के लिए कार्ययोजना तैयार कर केंद्र सरकार को भेजी जा चुकी है।

इस योजना के अंतर्गत उड़द, अरहर और मसूर को प्रमुख दलहनी फसलों के रूप में चयनित किया गया है। परियोजना के माध्यम से दलहन की उत्पादकता एवं गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ बीज उत्पादन, फसल प्रदर्शन और उन्नत कृषि तकनीकों पर आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाले बीज एवं आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के अलावा प्रदेश में दलहन प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना की दिशा में भी कार्य किया जाएगा। इससे स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आय बढ़ाने के नए अवसर उपलब्ध हो सकेंगे।

ये अधिकारी रहे मौजूद

बैठक में अपर सचिव मेहरबान सिंह बिष्ट, महानिदेशक कृषि एवं उद्यान आनंद श्रीवास्तव, विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के निदेशक लक्ष्मीकांत जी, पंतनगर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस.के. कश्यप सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।