देहरादून: उत्तराखंड में जनगणना के प्रथम चरण के तहत भवन गणना का कार्य शुरू हो चुका है। जनगणना कार्मिक घर-घर जाकर लोगों से भवन से संबंधित जानकारी जुटा रहे हैं। इस प्रक्रिया में कुल 33 सवालों के आधार पर डेटा एकत्र किया जा रहा है।
शासन ने स्पष्ट किया है कि जनगणना के इस कार्य में आम जनता और कार्मिक दोनों को पूरा सहयोग देना होगा। यदि कोई व्यक्ति सहयोग करने से मना करता है या गलत जानकारी देता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
नियमों के अनुसार, जनगणना कार्य में बाधा डालने या लापरवाही बरतने पर ₹1000 तक का जुर्माना और दोष सिद्ध होने पर 3 साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है।
क्या-क्या देना होगा जवाब?
जनगणना के दौरान नागरिकों को भवन से जुड़े सवालों का सही उत्तर देना होगा। साथ ही जनगणना कर्मियों को घर या परिसर में प्रवेश करने की अनुमति देनी होगी और भवन पर चिन्ह या नंबर डालने से मना नहीं किया जा सकेगा। हालांकि, कुछ परंपराओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने छूट भी दी है। कोई भी व्यक्ति अपनी पत्नी का नाम बताने के लिए बाध्य नहीं होगा। पत्नी भी पति या मृतक पति का नाम बताने के लिए बाध्य नहीं होगी।
कार्मिकों के लिए भी सख्त नियम
सिर्फ आम जनता ही नहीं, बल्कि जनगणना कार्मिकों के लिए भी सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। यदि वे अपने कर्तव्य में लापरवाही करते हैं, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। शासन ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे जनगणना कार्य में पूरा सहयोग करें, ताकि सही और सटीक आंकड़े जुटाए जा सकें। जनगणना एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय प्रक्रिया है, जिसमें हर नागरिक की भागीदारी जरूरी है। सहयोग न करने पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान इसे और गंभीर बनाता है।

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