काठमांडू। नेपाल में बुधवार, 26 अगस्त को आई विनाशकारी अचानक बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी। भोटेकोशी नदी और उसकी सहायक नदियों में अचानक आए तेज बहाव ने कई बस्तियों, घरों, वाहनों, पुलों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को अपनी चपेट में ले लिया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, आपदा में कम से कम 162 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 750 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में 133 भारतीय नागरिक, विदेशी नागरिक और सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं।
मध्य नेपाल के कई कस्बों और गांवों में बाढ़ का व्यापक असर देखने को मिला है। कई महत्वपूर्ण पुल बह गए हैं, जबकि करीब एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाओं के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। कई इलाकों में सड़क संपर्क टूटने से राहत और बचाव अभियान में भी मुश्किलें आ रही हैं।
ग्लेशियर क्षेत्र में हिमस्खलन को माना जा रहा संभावित कारण
‘द काठमांडू पोस्ट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआती जानकारी में आशंका जताई जा रही है कि किसी हिमस्खलन के कारण भोटेकोशी नदी की सहायक नदी ल्हेन्डे का बहाव बाधित हुआ और उसके बाद अचानक पानी का विशाल प्रवाह नीचे की ओर आया।
बाढ़ का पहला बड़ा असर चीन की सीमा के पास स्थित रसुवागढ़ी के तिमुरे क्षेत्र में देखने को मिला। अचानक आए पानी और मलबे ने देखते ही देखते बड़ी तबाही मचा दी। स्थानीय लोगों को पहले से किसी बड़े खतरे का अंदाजा नहीं था, क्योंकि इलाके में उस समय बारिश भी नहीं हो रही थी। ऐसे में लोग रोजमर्रा के काम में व्यस्त थे और अचानक आई बाढ़ ने उन्हें संभलने का मौका नहीं दिया।
आपदा की गंभीरता सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों ने बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया है।
ईशा फाउंडेशन के 80 विदेशी नागरिकों से संपर्क टूटा
बाढ़ के बीच ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने भी स्थिति को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने बताया कि तिब्बत-नेपाल सीमा के बीच उनका एक समूह फंसा हुआ है और टेलीकम्युनिकेशन सिस्टम ठप होने तथा सड़कें बंद होने के कारण उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है।
सद्गुरु के अनुसार, समूह में 80 लोग शामिल हैं। इनमें 22 अमेरिकी, 12 कनाडाई, 11 ऑस्ट्रेलियाई, 9 ब्रिटिश, 4 जर्मन, 3 फ्रांसीसी और 3 नेपाली नागरिक शामिल हैं। इसके अलावा नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, सिंगापुर और स्पेन के दो-दो तथा फिनलैंड, हंगरी, इजराइल, लिथुआनिया, फिलीपींस, पुर्तगाल, रूस और दक्षिण अफ्रीका के एक-एक नागरिक बताए गए हैं।
उन्होंने बताया कि समूह में 34 पुरुष और 46 महिलाएं हैं। इसके अलावा कुछ स्वयंसेवक और एक डॉक्टर भी आसपास के होटलों में रुके हुए थे। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि इन लोगों की स्थिति को लेकर अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
भारतीय वायुसेना ने भेजी राहत सामग्री
नेपाल में राहत एवं बचाव प्रयासों के बीच भारत ने भी मदद के लिए कदम बढ़ाया है। भारतीय वायुसेना (IAF) ने नेपाल के लिए करीब 10 टन आवश्यक राहत सामग्री और मेडिकल सप्लाई लेकर जाने के लिए C-130J विमान तैनात किया है।
वायुसेना के अनुसार, राहत सामग्री पहुंचाने के लिए C-17 और C-130 विमान लगाए गए हैं, जबकि बचाव कार्य और प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए हेलीकॉप्टरों को भी तैयार रखा गया है।
कई इलाकों में संपर्क व्यवस्था ठप
बाढ़ के कारण कई क्षेत्रों में सड़क और संचार व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। पुलों और सड़कों के क्षतिग्रस्त होने से प्रभावित इलाकों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। दूरदराज के क्षेत्रों में संपर्क टूटने के कारण लापता लोगों की वास्तविक संख्या और उनकी स्थिति का आकलन करने में भी समय लग रहा है।
नेपाल में जारी राहत और बचाव अभियान के बीच प्रशासन की प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को तलाशना, लापता लोगों का पता लगाना और प्रभावित इलाकों में आवश्यक राहत सामग्री पहुंचाना है।:::

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