देहरादून/हल्द्वानी
उत्तराखंड सरकार ने राज्य के सरकारी अस्पतालों में लंबे समय से ड्यूटी से गायब चल रहे बॉन्डधारी डॉक्टर्स के खिलाफ मुहिम तेज कर दी है।
राजकीय मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी से रियायती फीस पर पढ़ाई करने वाले कुल 70 डॉक्टरों को नोटिस जारी किया गया है। इनमें 49 एमबीबीएस और 21 विशेषज्ञ (पीजी) डॉक्टर शामिल हैं।
सरकार के अनुसार, इन डॉक्टरों को अनिवार्य सेवा के तहत राज्य के सरकारी अस्पतालों, खासकर पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में निर्धारित अवधि (3 से 5 साल) सेवा देना अनिवार्य था। बांड की शर्तों के अनुसार, पढ़ाई पूरी होने के बाद यदि डॉक्टर सरकारी सेवा में शामिल होकर निर्धारित अवधि तक सेवा नहीं देते, तो उन्हें बांड राशि जमा करनी होती है।
कॉलेज प्रबंधन और चिकित्सा शिक्षा विभाग ने इन डॉक्टरों को नोटिस में स्पष्टीकरण देने को कहा है। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि अगर डॉक्टर बांड की शर्तों का पालन नहीं करते हैं तो उन्हें निर्धारित राशि जमा करनी होगी, जो लाखों से करोड़ों तक हो सकती है। इसके अलावा विभाग आगे की कानूनी कार्रवाई करेगा, जिसमें सेवा समाप्ति, पेनल्टी और राशि वसूली शामिल है।
ड्यूटी से गायब डॉक्टर 2004 से लेकर 2027 बैच तक के हैं। इन डॉक्टरों को उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों के सरकारी अस्पतालों में तैनाती दी गई थी। लेकिन समाज सेवा का वादा कर भी ये डॉक्टर लंबे समय से अपने तैनाती स्थलों पर अनुपस्थित हैं। ना तो बांड राशि जमा कर रहे हैं और ना ही निर्धारित सेवा शर्तों के अनुसार ड्यूटी कर रहे हैं।
विशेषज्ञ और एमबीबीएस डॉक्टरों की अनुपस्थिति से ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं पर नकारात्मक असर पड़ा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि कई जगहों पर गंभीर मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है।
ड्यूटी से गायब चल रहे डॉक्टरों में सबसे ज्यादा 17 डॉक्टर नैनीताल जिले से हैं। हैरानी की बात यह है कि नैनीताल जिला अन्य जिलों की तुलना में सुविधाओं और आवागमन के लिहाज से बेहतर माना जाता है, लेकिन वहां भी डॉक्टर ड्यूटी से गायब हैं। दूसरे नंबर पर चमोली जिला है, जहां 14 डॉक्टरों की अनुपस्थिति सामने आई है। इसके अलावा ऊधमसिंह नगर, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जैसे जिलों में भी कई डॉक्टर लंबे समय से ड्यूटी से अनुपस्थित पाए गए हैं।
राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी से रियायती फीस पर पढ़ाई करने वाले डॉक्टरों को बांड के अनुसार राज्य के सरकारी अस्पतालों में 3 से 5 साल तक ड्यूटी करनी थी। अगर डॉक्टर यह शर्त पूरी नहीं करते हैं, तो उन्हें बांड राशि जमा करनी होती है। इस राशि का उद्देश्य सरकार को वित्तीय हर्जाना देना और स्वास्थ्य सेवा में अनुपस्थिति रोकना है।
निदेशक चिकित्सा शिक्षा उत्तराखंड डॉ. अजय आर्य ने कहा कि अपने तैनाती स्थल से गायब चल रहे बांडधारी डॉक्टरों को नोटिस भेजा गया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि डॉक्टर निर्धारित अवधि तक ड्यूटी नहीं देते, तो उन्हें बांड के मुताबिक लाखों-करोड़ों की राशि जमा करनी होगी। साथ ही विभाग सेवा समाप्ति और कानूनी कार्रवाई के विकल्प पर भी विचार कर रहा है।
राज्य में लंबे समय से डॉक्टरों की अनुपस्थिति से ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति चिंताजनक हो गई थी। कई बार गंभीर मरीजों को समय पर उपचार न मिलने के कारण जान-माल का जोखिम भी बढ़ गया। नोटिस और कड़ी कार्रवाई के बाद प्रशासन का उद्देश्य इन क्षेत्रों में डॉक्टरों की तैनाती सुनिश्चित करना और ग्रामीण जनता को स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर उपलब्धता प्रदान करना है।
प्रदेश सरकार की इस पहल को स्वास्थ्य सेवा में सुधार लाने और डॉक्टरों की अनिवार्य सेवा की शर्तों के पालन को सुनिश्चित करने की दिशा में बेहद अहम कदम माना जा रहा है।

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